ताजमहल
ताजमहल का ताजमहल होना
सचमुच का ताजमहल होना है
जैसे आगरे का ताजमहल।
ताजमहल यदि सच्चा ताजमहल है
वह प्रेम का मिन्दर होगा
जैसे मैं और उनका प्रेम।
ताजमहल कहते सुनते ही
रोमांचित हो उठता है जिसका तनम न
समझो हो गया है उसे कुछ कुछ
एक और ताजमहल बनाने का रोग।
लोग घरों में ताजमहल नहीं
पे्रम भवन सजा रखते हैं
यादें बनी रहे ताजा उम्रभर
दिलाते हुए याद एक दूजे को।
मैं तेरा शाहजहां ,मुमताजमहल तू मेरी
गाते रहेंगे सुर ताल मिलाकर
यमुना संभाले रखेगी जब तक
पूरनमासी में जगर मगर करता ताजमहल ।
जन्नत है तो कहीं और नहीं
हुस्न है तो कहीं और नहीं
इश्क है तो कहीं और नहीं
जिस्त है तो कहीं और नहीं
ख्वाब है तो कहीं और नहीं
यादें है तो कहीं और नहीं
तसव्वुर है तो कहीं और नहीं
सिर्फ आगरे जाकर देखो यमुना किनारे
नत , हुस्न, इश्क , जिस्त ,ख्वाब
यादे-तसव्वुर एक साथ दिखाई देंगे
जगर मगर करते हुए दुधिया रातो में
ताजमहल का ताजमहल होना ही
सचमुच का प्रेममहल होना है
जैसे आगरे का ताजमहल
जैसे मैं और उनका पे्रम ।
0000......28/06/2007 गुरूव
जगह
अलावा इसके हो क्या सकता है कि
अब तक न बनवा सका
हृदय में उनके ज़रा सी जगह।
उम्र के उस पड़ाव पर होना चाहिए था
जिस पड़ाव पर वे खड़े है
जिस बात पर वे अड़े हैं
चुनने की अकांक्षा लिए हुए कोई फूल
बासा और उजड़ा हुआ बागान
क्या करेंगे सजाकर वे।
कब का हो जाना चाहिए था निर्णय
या कैद हो जाना चाहिए थी उम्र भर की
या खुल्ला छोड़ दिया जाना चाहिए था
बेलगाम भटकने के लिए।
कम से कम बन ही जानी चाहिए थी अब तक जगह
जिससे पुरसुकून हो सकें
कि कैद कर लिया गया है उम्र भर
कि खुल्ला छोड़ दिया गया हूं सांड की तरह ।
फिर करना चाहता हूं निवेदन
अब तो खुला छोड़ दो दरवाज़ा
आ जा सकूं निस दिन चाहे जब
बनवा सकूं एक छोटी सी जगह
हृदय के उनके किसी कोने में।
00 01.07.2007...1:30 बजे
जन्म दिन का गणित
माँ ने बताया
जिस दिन तू पैदा हुआ
उस दिन पूनम की सुबह थी
सारा दिन रिमझिम रिमझिम पानी बरस रहा था
गाय,भैंस और बकरियाँ
चरने चली गई थी जंगल
स्कूल की छुटि्टयाँ खत्म हो गई थी
पड़ौसी की लड़की
स्कूल जाने लग गई थी
और हाँ ,जिस साल तू पैदा हुआ था
उसी साल पं.जवाहरलाल नेहरू आये थे
उद्घाटन करने कारखाने का
लग गई थी तेरी नाक
हाथों में उनके, और
मुस्करा दिये थे पंडित नेहरू ।
पूरे पचपनवे बरस के दिन
जब ताजमहल को
सातवे अजूबे में
शामिल करने की मूहिम चल रही थी
और निर्णय होना शेष रह गया था
सप्ताह का सातवां दिन था
महिने की सातवीं तारीख थी
साल का सातवां महिना था
सदी का सातवां वर्ष था
यानी सभी सात सात सात।
तब मैं अकेला एकान्त में बैठा
लिख रहा हूँ जन्म दिन के गणित की कविता
न केक न केण्डिल न मिठाई
न ही कोई संगी-साथी
और न ही कोई हेप्पी बर्थ डे टू यू ।
07.07.2007शनिवार रात 10.00बजे
ख़लील कुरैशी को श्रद्धांजली
1 सप्ताह पहले
